
सप्लाई के आधार पर सप्लाई के आधार पर सोलर पंप को दो भागों में बांटा गया है
- A.C Pump – AC pump से तात्पर्य यह होता है कि सोलर पैनल से आने वाली डीसी सप्लाई को कंट्रोलर के माध्यम से एसी सप्लाई में बदल जाता है फिर कंट्रोलर से निकलने वाली एसी सप्लाई मोटर को प्रदान की जाती है
नोट – एसी सप्लाई वाली मोटर इलेक्ट्रिक सप्लाई तथा सोलर सप्लाई दोनों सप्लाई पर चलती है
2 . D.C Pump – डीसी पंप से तात्पर्य यह होता है कि इसमें सोलर पैनल से आने वाली डीसी सप्लाई को कंट्रोलर के माध्यम से संतुलित तरीके से डीसी मोटर तक आवश्यक डीसी वोल्टेज के रूप में ही पहुंचाया जाता है
नोट – डीसी सप्लाई वाली मोटर केवल सोलर पैनल पर ही चलाई जाती है इलेक्ट्रिक सप्लाई पर इसे नहीं चलाना चाहिए
सरफेस के आधार पर – सरफेस के आधार पर सोलर पंप का तीन प्रकार के होते हैं
- सबमर्सिबल सोलर पंप – इस प्रकार के सोलर पंप का उपयोग मुख्य रूप से बोरिंग में किया जाता है क्योंकि उनकी संरचना बेलनाकार तथा लंबाई 2 से 3 मीटर तक हो सकती है बोरिंग की चौड़ाई आमतौर पर 6 इंच या 8 इंच होती है
2 . मोनोब्लॉक सोलर पंप – इस प्रकार के सोलर पंप का उपयोग मुख्य रूप से वहां किया जाता है जहां बोरिंग में वाटर लेवल 30 से 40 फुट तक हो कहीं-कहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किस इसका उपयोग कुआं तथा डिग्गी में भी करते हैं
3 . सोलर वाटर पंप – इन पंप को समानता मेंढक पंप या मछली पंप के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह पंप पानी में डूबे रहते हैं
डिस्चार्ज हेड के आधार पर –
डिस्चार्ज हेड के आधार पर साधारणतः पंप 30 मीटर 50 मीटर 70 मीटर 100 मीटर आदि हेड में उपलब्ध होते हैं
नोट – डिस्चार्ज हेड के पंप में मुख्य फर्क इंपैलर ब्लड की संख्या का होता है उसी के आधार पर हेड बनाए जाते हैं
कैपेसिटी के आधार पर –
यहां पर कैपेसिटी से तात्पर्य है पंप की हॉर्स पावर या किलोवाट क्षमता से होता है जो पंप जितने ज्यादा किलोवाट का होता है उसकी वॉटर डिसचार्ज कैपेसिटी भी उतनी ही अधिक होती है किसान भाई मुख्य रूप से 3 HP , 5 HP , 7.5 HP या 10 HP के पंप अपने खेतों में लगवाते हैं